संत, विद्वान, और लोक विभूतियाँ जो मात-पिता गौधाम पधारीं — उनकी ही ज़ुबानी।
पीठाधीश्वर, भृगु पीठ · महामंडलेश्वर · राष्ट्रीय संयोजक, सर्व धर्म संसद
“निसंदेह यह सिद्धपीठ है।”
गौऋषि · परम श्रद्धेय आध्यात्मिक गुरु
“2011 में तब यहां कोई गौवंश नहीं था। यहां हुई प्रगति व गौ सेवा को देखकर मन गदगद हुआ।”
ब्रह्मऋषि · योगी सम्राट
“माता-पिता व गौ माता की सेवा का यह दिव्य स्वरूप देवराहा बाबा की कृपा का ही परिणाम है।”
ब्रह्मर्षि · संस्थापक के गुरु
“अपने शिष्य गोचर दास ज्ञान की गौ सेवा देखकर हृदय की गहराइयों से आशीर्वाद।”
पातड़ा के मौनी संत
“मौन रहते हुए भी आंखों ही आंखों में स्पष्ट किया कि यह मेरी नंदिनी माता के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान है।”
योग मनीषी · संस्थापक, आचार्य सुशील मुनि मिशन
“इस विचारधारा को प्रधानमंत्री मोदी तक ले जाना है जिससे यह पूरे विश्व में फैल सके।”
आचार्य · अंतर्राष्ट्रीय वैदिक कथावाचक
“माता पिता व गौ माता को समर्पित यह महातीर्थ दुनिया में एक अनूठा दिव्य स्थान है।”
स्वामी · भूरी वाले पीठ
“गोचर दास ज्ञान के अंदर गौ माता के प्रति प्यार व सेवा भाव देखकर बार-बार यहां आने का मन होता है।”
संत · खड़ेश्वरी पीठ
“श्री गोचरदास ज्ञान जी की गौ भक्ति को हृदय की गहराइयों से साधुवाद।”
गौ वत्स · स्वामी दत्तशरणानंदजी के शिष्य
“गौ माता का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।”
महासाध्वी · चिकित्सक
“यह माता-पिता व गायों के लिए एक सुरक्षित स्थान है।”
महासाध्वी
“अत्यंत शांत व पवित्र स्थल तथा समाज सेवा प्रशंसनीय है।”
विद्वान व यायावर
“मैंने देश दुनिया घूमी है। यहां जैसी गौ निष्ठा नहीं देखी।”
पूर्व विधायक · चिकित्सक
“पंजाब जैसे राज्य में ऐसी गौ सेवा व माता-पिता के लिए आदर भाव कहीं नहीं देखा।”
फिल्मकार · राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता
“माता-पिता से बढ़कर कोई धर्म नहीं है और इनकी सेवा परमात्मा की सेवा है।”
मुंबई डब्बा वाला · सामाजिक उद्यमी
“मुंबई से यहां आकर विश्व के प्रथम मात-पिता गौधाम के दर्शन करना अत्यंत सौभाग्यशाली रहा।”