विश्व का प्रथम मूर्ति-रहित मंदिर कैसे बना
बनूड़ में 10 एकड़ में फैला महातीर्थ, जहाँ भक्ति का मापदंड मूर्तियाँ नहीं — जीवित माता-पिता का सम्मान और गौ माता की सेवा है।
आरम्भ की कहानी
जब संयुक्त परिवार टूटकर वृद्धाश्रम बनते गए और हमारी पूजनीय गौ माता कटान की ओर बढ़ती गई — तब एक साधक ने सरल प्रश्न पूछा: क्या ऐसा मंदिर हो सकता है जहाँ कोई मूर्ति न हो, केवल जीवित माता-पिता और गौ माता का सत्कार हो? उसी प्रश्न से यह धाम जन्मा।
संस्थापक
श्री ज्ञानचंद जी वालिया· गौचर दास ज्ञान जी
ब्रह्मर्षि श्री देवदास जी महाराज के शिष्य और देवराहा बाबा के आशीर्वाद से युक्त, गौचर दास ज्ञान जी ने गौ माता की हर आह को अपनी वेदना माना। उसी संकल्प से आज लगभग 400 देसी गौवंश यहाँ सुरक्षित हैं, और विश्व का पहला मूर्ति-रहित मंदिर आकार ले रहा है — जहाँ केवल माता-पिता की पूजा होगी।
गौ माता की हर एक आह को जिन्होंने अपनी वेदना माना, धन्य है गौचर दास ज्ञान जी जिन्हें संतों ने भी जाना।यात्रा
21 नवंबर 2011
भूमि पूजन
देश भर के संतों के आशीर्वाद से ग्राम खल्लौर में भूमि पूजन। परम श्रद्धेय गौऋषि स्वामी दत्तशरणानंदजी जी उपस्थित — तब यहाँ एक भी गौवंश नहीं था।
12 सितंबर 2012
पहली पाँच गौ माताएँ
पातड़ा वाले मौनी बाबा जी ने पहली पाँच नंदिनी माताओं को धाम को समर्पित किया। टिन शेड में उनका आश्रय हुआ — गौशाला का आरंभ।
10 अप्रैल 2019
शिलान्यास
विश्व के प्रथम मूर्ति-रहित मात-पिता मंदिर का शिलान्यास पाँच दिवसीय अखंड मात-पिता यज्ञ के साथ। हज़ारों भक्तों की उपस्थिति।
आज
10 एकड़ का महातीर्थ
तीन अत्याधुनिक गौशालाओं में लगभग 400 देसी गौवंश। मंदिर का बेसमेंट व भू-तल पूर्ण। नंद भवन तथा नंदिनी ऑडिटोरियम निर्माणाधीन। लंदन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में सम्मानित।
आज का धाम
- एकड़
- 10
- देसी गौवंश
- ~400
- मंदिर खंड
- 10
- वर्ष सेवा
- 15+
मूर्ति-रहित विचार
संसार भर के मंदिर पत्थर से गढ़ी मूर्तियों को समर्पित हैं। यह मंदिर उनको समर्पित है जिन्होंने आपको जीवन दिया, और उस माता को जिसने पीढ़ियों तक भारत का पालन किया — आपके माता-पिता, और गौ माता। यहाँ कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है। भक्तों से कहा जाता है — अपने माता-पिता के चरण छुएँ, और एक जीवित गौ की सेवा करें। संस्थापक कहते हैं — ईश्वर वहीं निवास करते हैं।
प्रातः काल उठकर रघुनाथा, माता-पिता गुरु नावे माथा।
देश-विदेश में सम्मान
इस धाम के विचार को क्षेत्रीय समाचार पत्रों से लेकर लंदन की रिकॉर्ड पुस्तकों तक — और ब्रिटिश पार्लियामेंट के सदन तक — पहुँचाया जा चुका है।
- ब्रिटिश पार्लियामेंट, हाउस ऑफ लॉर्ड्स · लंदन
- वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स · लंदन
- भारत कीर्तिमान · भारत
- दैनिक भास्कर, अमर उजाला, जागरण, आज समाज तथा क्षेत्रीय प्रेस में विस्तृत कवरेज
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अपने माता-पिता के नाम पर संकल्प पंजीकृत करें, अथवा आज की गौ सेवा में योगदान दें।
